आँखों की सुरक्षा

आँखों की सुरक्षा (Care For Healthy Eyes In Hindi)

यदि आँखो का पूरा ध्यान न रखा जाए तो  इससे आँखों की दृष्टि पर प्रभाव पड़ सकता है. कुछ साधारण से प्रयोग करने से आँखों के स्वास्थ्य को उत्तम दशा में रखा जा सकता है. सर्वप्रथम ये समझना आवश्यक है कि आँखों से देखना और इस इंद्रिय की सक्रियता और प्राण उर्जा जीवन को कितना खूबसूरत बना देती है.
eye-care hindi ayurvedaप्रातः काल उठने के बाद सर्वप्रथम आँखों को बंद रखते हुए अपने मुख में पानी भरीये. कुछ देर इस पानी को मूह में रखकर फिर निकाल दें. ऐसा 2-3 बार करें. रोज़ सुबह खुले वातावरण में जाकर आँखों की पुतली हल्का व्यायाम देना बहुत लाभदायक है. अंगूठे को सामने लाकर आँखों के बीचो-बीच बाह को सीधा करते हुए रखें. अब स्थिर रहते हुए आँख की दृष्टि को अंगुष्ठ पर साधें. अब अंगुष्ठ को धीरे-धीरे बाईं ओर लेकर जाएँ और दृष्टि को अंगूठे पर टिकाकर ही रखें. धीरे-धीरे अंगुष्ठ को दायें ओर लेकर जाएँ  और इसी प्रकार आँखों की पुतली को अंगूठे पर त्राटक करते हुए ही रखें. इसी तरह अंगूठे को 2-3 बार दाएँ से बाएँ लेकर जाएँ और साथ में आँखों की पुतली को अंगूठे पर दृष्टि एकाग्र रखते हुए घुमाएँ. आँखों की पुतली को आँख के अंदर चार स्थानों पर घुमाएँ. पहले घड़ी नुमा (clock-wise) और फिर घड़ी के विपरीत (anti-clockwise) चलती हुई सुई के समान.
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प्रातः काल  उठकर पेट का सॉफ होना आँखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है. स्नान करते हुए गर्दन से ऊपर के क्षेत्र में गर्म पानी का उपयोग न करें.  यदि अत्याधिक सर्दी हो तो भी हल्के गर्म पानी का ही इस्तेमाल करना चाहिए. बहुत अधिक गर्मी से आँख को बचाएँ. धूप में बाहर जाते समय आँखों को बचाने वाले चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए. आँखों को धूल, मिट्टी से भी ये चश्मा बचाकर रखता है. आँखों को रोज़ सुबह गुलाब जल से धोना चाहिए. अंजुलि में गुलाब जल भरकर, आँख की पुतली को उसमें डूबाएँ. वास्तव में गुलाब जल की ठंडक स आँखों को बहुत लाभ मिलता है. और आँखों में तेज़ पानी के छींटे नही मारने चाहिए. हथेली में पानी भरकर आँख को उसमें धोएँ. आँखों को कभी मलना नहीं चाहिए. यदि आँखों में जलन या किसी प्रकार की उत्तेजना हो तो थाने पानी से इन्हे धोएँ और मलें नहीं. रात को अच्छी प्रकार से सोना भी आँखों के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है.
त्रिफला के पानी से आँखों को धोना भी बहुत लाभदायक है. त्रिफला का 1 चम्मच रात्रि को भिगो कर रखें. सुबह उठकर इसे पतले मलमल के कपड़े में से छान लें. जो पानी मिलता है उस से आँखों को नर्मायी से धोएँ या फिर आइ ड्रॉपर से दोनों आँखों में 5-6 बूँदें  एक ही समय में दो बार डालें. यदि आपको जल नेति की क्रिया आती है तो यह सर्वोत्तम है. जल नेति करने के बाद नासिका में से प्राणायाम द्वारा पानी को अच्छी तरह सुखाकर 2-3 बूँदें गाय के दूध से बने घृत की डालें. इस प्रयोग से कपाल का पूरा हिस्सा सॉफ हो जाता है और्र उर्जामई होकर सभी इंद्रियों में नवीन उर्जा का संचार करता है.


दृष्टि में कमी आने के कुछ कारण (Causes Of Reduction In Eyesight In Hindi)

  • अत्याधिक तीखे, खट्टे-मीठे पदार्थों का सेवन करना.
  • अधिक देर धूप में रहना.
  • नजला, जुकाम का लगातार रहना.
  • अनियमित रूप से सोना.
  • बहुत दूर की चीज़ों को देखते रहना.
  • बहुत तनाव और सोच-विचार के भावमें रहना.
  • शरीर में मल-मूत्र या फिर छींक जैसे वेगो को रोकना.

    आँखों के स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त खाद्य पदार्थ (Diet For Healthy Eyes In Hindi)

  • गाजर को खाने से और इसका रस सेवन करने से आँखों को विटामिन आ की प्रचुर मात्रा मिलती है. यह आँखों के लिए लाभदायक शाक है.
  • याद रखिए नवजात शिशु जिनको माता का दूध पिलाया जाता है, उन्हें आँखों सी संबंधित रोग होने की संभावना बहुत घाट जाती है.
  • आमला का रस प्रतिदिन सेवन करना आँखों के लिए अत्यंत हितकर है. अम्लकि नाम की औषधि का सेवन विशेष लाभ देता है. वास्तव में आमला चाक्षुश्य के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है नेत्रों को पुष्टि प्रदान करने वाला.
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  • हरी पत्तेदार सब्जियाँ जैसे पालक, धनिया भोजन में अवश्य प्रचुर मात्रा में लें. साथ ही पीली और लाल रंगत वाली सब्जियाँ और फलों का सेवन जैसे कि कद्दू, गाजर, शिमला मिर्च, टमाटर, आम, पपीता, अमरूद, नींबू, संतरा इन सबका सेवन भी आँखों के लिए बहुत लाभदायक है.
  • दूध, दही, गाय या बकरी के दूध से बना घी भी बहुत उपयोगी है.
  • 100 ग्राम की मात्रा में हरी एलाईची, मीठी सौंफ और मिश्री लीजिए. तीनों को बारीक पीस लें. अब इनको अच्छी तरह मिला लीजिए. इस मिश्रण का एक चम्मच रोज़ सुबह खाली पेट दूध के साथ सेवन करने से आँखों की दृष्टि मजबूत बनती है. कईयों का तो चश्मा भी इससे उतर जाता है.

    कुछ ज़रूरी सुझाव (Some Important Suggestions In Eye-Care In Hindi)

  • गर्मी के मौसम में आँखों को दिन में दो -तीन बार धोएँ.
  • यदि आप कंप्यूटर द्वारा काम करते हैं, तो लगातार स्क्रीन पर दृष्टि को जमने से बचाईए. मतलब बीच बीच में आँखों को इधर-उधर बी घुमाएँ और दाएँ-बाएँ देखें. इससे आँखों की मांसपेशियों में अतिरिक्त तनाव हट जाता है.
  • बस में बैठकर लॅपटॉप का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. लगातार हिलती हुई स्क्रीन को देखने  से आँखों और मस्तिष्क की नसों पर दुष्प्रभाव पड़ता है. 
  • कंप्यूटर की स्क्रीन आँखों के बराबर ही होनी चाहिए, ऊपर अथवा नीचे नही. टीवी अथवा कंप्यूटर को लगातार एक घंटे से ज़्यादा ना देखें.
  • जहाँ अच्छे प्रकार से रौशनी ना हो, उस स्थान पर पढ़ने-लिखने का काम ना करें. पढ़ाई करते वक़्त पीछे की ओर से बाएँ भाग से यदि रौशनी आए तो सर्वोत्तम स्थिति है. इससे आँखों पर रौशनी का बोझ नही पड़ता. व्यक्ति को पढ़ना भी सुखकारी प्रतीत होता है. बच्चों की पढ़ने की बैठक इस बात को ध्यान में रखकर बनाएँ.
  • बारिश के मौसम में आँखों में इन्फेक्षन यानी रोगकारी कीटानियों द्वारा संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए इस समय में आँखों की सफाई और उचित आहार-विहार पर विशेष ध्यान दें.
  • आमला के सेवन से शरीर की रोग-प्रतिकारक शक्ति बढ़ती है, इसलिए इसका नित्य सेवन करना हर प्रकार से हितकारी है.
  • छोटे बच्चों को स्वास्थ्य आहार देना उनकी आँखों के स्वास्थ्य के लिए अति आवश्यक है. इसके साथ-ही-साथ आँखों की नियमित जाँच बच्चों में बहुत ज़रूरी है. जब आपस में बच्चे खेल रहे हों तो बड़े अवश्य ध्यान रखें की वे एक दूसरे पर घातक प्रहार ना करें जैसे कि काई बार खेल- खेल में एक- दूसरे को नुकीली चीज़ चुभा देते हैं या आँख में पत्थर मार देते हैं. खेलने के लिए भी नुकीली वस्तुएँ न दें जिससे अंजाने में ही बच्चे अपने नेत्रों में हानि कर लें. ज्वलनशील पदार्थों को बालकों से दूर रखें और उत्सव या धूमधाम के समय में उनका पाटखों से बचाव होना चाहिए. बचपन से ही बच्चों को आँख के व्यायाम और  आँखों की देखभाल की आदत डालनी चाहिए. साथ में यदि त्राटक विधि सिखाई जाए तो और भी लाभदायक है.


    आँखों के लिए लाभकारी प्रयोग (Helpful Natural Practices For Healthy Eyes In Hindi)

नेत्रतर्पण की विधि
इस विधि में औषधीय तेल को आँखों की पुतलियों के ऊपर कुछ देर रखा जाता है जिससे उनमें व्याप्त दोषों का शमन हो जाता है. पाद अभ्यन्गम करने से भी आँखों की नसों में मजबूती आती है.

योगाभ्यास
यदि रोज़ 6 सूर्य नमस्कार आसनों के साथ भुजंगासन, उष्ट्रासन, चक्रासन, मत्स्येन्द्रासन का अभ्यास किया जाए, या केवल सूर्य नमस्कार के साथ भुजनसान का नित्य अभ्यास हो तो यह पूरे स्नायु मंडल को मज़बूत कर आँखों की इंद्रिय पर बहुत सुंदर प्रभाव डालती है.
हाथों को अच्छी तरह आपस में रगड़िए, इतना कि वे गर्म हो जाएँ. अब इन हाथों को आँखों पर तुरंत आँखों पर रखिए. इस घर्षण से उत्पन्न उर्जा आँखों के लिए अत्यंत लाभदायक है.

त्राटक
इस विधि में किसी एक वास्तु विशेष पर आँखों की दृष्टि को केंद्रित करना होता है. जैसे कि मोमबत्ती या दीपक की लौ अथवा कोई सुंदर चित्र या ईष्ट देव की मूरत पर दृष्टि को केंद्रित किया जाता है. दृष्टि केंद्र को आँखों से 1-1.5 बाजू के फ़ासले पर आँखों की सीध में रख कर 15-20 मिनट दृष्टि को टिकाना चाहिए. धीरे-धीरे आप अवधि को बढ़ा भी सकते हैं. पहले आँखों में पथराहट महसूस हो सकती है, फिर इन में से पानी आएगा. जब पानी आने लगे तो पलकों को बंद कर आँखों को विश्राम दें. पुनः प्रयोग को करें जब तक निर्धारित अवधि पूरी ना हो जाए.

पंचकर्म
आँखों के स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए पंचकर्म की कई अन्य विधियाँ जैसे कि शिरोबस्ती, नास्य,  पीचू, पुटापक भी लाभकारी हैं.

  • चमेली और गेंदे के फूलों से बनी कड़े को ठंडा करके आँखों पर लगाने से ठंडक मिलती है.
    अरिंड का तेल आँखों में डालना भी हितकर है.
  • चंद्रोदय वर्ती नामक औषधि का लेपन आँखों पर करने से नेत्र-शोथ अथवा कंजाक्तिविटिस (conjunctivitis) और मोतिया के रोग से आँखों को आराम मिलता है.
  • आँखों में लालिमा हटाने के लिए चंदन और दूध का पेस्ट उपयुक्त है.
  • आँखों के आसपास काले घेरे हटाने के लिए बादाम रोगन, तिल तेल, या अरिंड के तेल से हल्की मालिश करना लाभप्रद है.