Ayurveda In Hindi

पीलिया (Jaundice) का आयुर्वेदिक उपचार

जौंडीस अथवा पीलिया (Jaundice in Hindi)

इस रोग को आयुर्वेद में काम्ल भी कहा जाता है. इसमें रोगी की आँखों की पुतलियाँ, त्वचा एवं श्लेष्मा झिल्ली पीली रंगत में आ जाती है. बाईल जिगर द्वारा उत्पन्न स्राव  है जो पुराने लाल रक्त कोषों के टूटने पर निर्मित होता है. इसके द्वारा भोजन में मौजूद वसा का पाचन किया जाता है. परन्तु जब  इसका निकास पाचन तंत्र द्वारा न होकर रक्त में जस्प होने लग जाए एवं अत्याधिक रूप से शरीर में एकत्रित होने लगे तो यह चिन्ह है जिगर में रोग का. रोग के कारण उत्पन्न पीलेपन को कोष्टाश्रित काम्ल कहते हैं.
जब यह रोग किसी जिगर की नलिका में अवरोध के कारण उत्पन्न हुआ हो उसे , साखश्रित काम्ल कहते हैं.Jaundice treatment in hindi
अब्स्ट्रक्टिव जौंडीस का कारण है जिगर की नलिका में उत्पन्न पित्त पथरी (gallstones), ट्यूमर (tumor) अथवा सूजन (inflammation) हो सकता है.
जिगर की कोशिकायों में जौंडीस का कारण है जिगर की कोशिकायों का किसी दवाई अथवा वाइरस के कारण क्षतिग्रस्त हों जाना.


पीलिया के लक्षण (Symptoms Of Jaundice)

  • इस रोग के लक्षण उसके कारक पर निर्भर करते हैं . आम तौर पर इस रोग में फ़्लू जैसे लक्षण पाए जाते हैं. रोगी को शरीर में कमज़ोरी, थकावट, भूख ना लगना , वमन, दस्त लगना, पूरे शरीर में खुजलाहट इस सब प्रकार के लक्षण देखने को मिलते हैं.jaundice symptoms in hindi
  • जब जिगर से उत्पन्न बायल का निकास शरीर के पाचन तंत्र द्वारा नही हो पाता तब यह धीरे-धीरे रक्त और फिर रोगी के पेशाब में प्रकट होने लगता है. श्वास में दुर्गंध, मुँह में कड़वा स्वाद, गहरा पीले या चाय के रंगत का पदार्थ रोगी की पेशाब और मल में पाया जाता है. रोगी के जिगर में सूजन भी पाई जाती है.

    आयुर्वेद द्वारा चिकित्सा का लाभ (Benefits of Treatment Through Ayurveda)

    आयुर्वेदीय औषधियों द्वारा शरीर में उर्जा का नवनिर्माण होता है. तथा शरीर में इस रोग से लड़ने के लिए रोगी को ताकत मिलती है. यह जिगर की कार्यशक्ति में वृद्धि करती हैं तथा बायल के प्रवाह को जिगर नलिका में बढ़ाती हैं. इन सभी औषधियों का प्रयोग व्यक्ति में अहानिकर है और इससे शरीर पुनः स्फूरतिवान बन जाता है.


    पीलिया  का उपचार: Treatment of Jaundice in Hindi

    इस रोग का उपचार ऐसी विरेचन क्रिया से किया जाना चाहिए जो जिगर पर आए बायल के प्रादुर्भाव को कम करे. रक्त में मौजूद बायल को निकालने के लिए  मूत्रवर्धक (diuretic) औषधि देनी चाहिए.

  • त्रिवारी/ कुटकी: इस रोग के उपचार की दो बड़ी लाभकारी औषधियाँ हैं. दोनो औषधियों के पाउडर का १ से 2 चम्मच रोज़ गर्म पानी के साथ दिन में २ बार प्रयोग किया जाना चाहिए.
  • अविपत्तिकर चूर्ण अथवा अरोग्यवर्धिनि वॅटी: यह जिगर को स्वस्थ प्रदान करने वाली कई औषधियों का मिश्रण है. इस चूर्ण का 1 चम्मच गर्म पानी के साथ दिन में दो बार रोज़ दिया जाना चाहिए. यह औषधि 250 मिलीग्राम वॅटी के रूप में भी मौजूद है जिसका सेवन गर्म पानी या शहद के साथ किया जाना चाहिए.bhumyamalaki for jaundice in hindi
  • वासक, काकामची, त्रिफला: ये औषधियाँ भी पीलिया के इलाज में लाभ प्रदान करने वाली हैं.
  • भुमयामल्की औषधि बहुत सी पत्तियों वाली एक herbal औषधि है जो पीलिया के इलाज में बहुत कारगर सिद्ध होती है.
  • इसके अलावा पुनर्णवादी मंदूर, कुमारियासाव नामक औषधियाँ भी इस रोग के उपचार में प्रयोग की जाती हैं.

    पीलिया में प्रयोग होने वाले कुछ घरेलू उपचार (Home Remedies Useful In Jaundice In Hindi)

  • 4-5 टमाटर लीजिए. उन्हें 400-500 मिलीलीटर पानी में १५ मिनिट तक उबालें. उबले हुए टमाटरों का छिलका निकाल लें तथा इनका पेस्ट बना लें. इस घोल को छान कर इसका जुयक निकाल लें. नीत्यप्रति इस जूस को पीने से रोग की निवरत्ति करने में सहायक है.home remedy for jaundice in hindi
  • 2 खजूर, 7 बादाम, 3 हरी एलाईची लेकर इनको रात भर पानी में भिगो दें. प्रातः उठकर इस मिश्रण का पेस्ट बना लें तथा २ बड़े चम्मच चीनी और एक बड़ा चम्मच माखन मिलाकर दिन में एक बार अवश्य सेवन करें.
  • 1 गिलास पानी में दो चम्मच हल्दी घोलकर इसको हर रोज़ सेवन करें.
  •  पीपल की छाल को रात भर पानी में भिगोकर रख दें तथा इसका पानी सुबह छान कर पी लीजिए.
  • घृत कुमारी का रस रोगी को पिलाने से जिगर में से जीव विष का निकास हो जाता है तथा इसकी कार्यक्षमता में वृद्धि होती है.

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