नकसीर का फूटना: आयुर्वेद द्वारा उपचार

नासगत रक्त पित्त/ नकसीर का फूटना (Nose-Bleed/ Epistaxis In Hindi)

नासगत रक्त पित्त के कारण बहुत बार नासिका से खून की नकसीर फूट जाती है. यह तकलीफ़ गर्मीयों में अधिक होती है और ख़ासकर बच्चों में यह ज़्यादा पाई जाती है. असल में वातावरण में अत्यंत शुष्कता और गर्मी के कारण, नासिका में संरक्षक श्लेष्मा धार सूख जाती है. अत्याधिक गर्मी से शरीर में पित्त भी बढ़ जाता है जिसका प्रभाव नासिका की नसों पर पड़ता है और उनसे खून का रिसाव होने लगता है.
गर्मियों में आंतरिक संरक्षक झिल्ली एलर्जी के प्रति भी अधिक संवेदनशील होती है.
यह अतिसंवेदनशीलता भी नाक से खून आने का कारक बन जाती है. जब नाक की आंतरिक सतह की झिल्ली उत्तेजित होकर झड़ जाती है तब नकसीर फूटने की हालत पैदा हो जाती है.


नाक से खून बहने के साधारण कारण (Common Reasons For Nose-bleed In Hindi)

  • नासिका के अंदर किसी तरह के घाव का उत्पन्न होना
  • किसी अन्य घातक रोग का लक्षण
  • यदि बहुत अधिक देर तक गर्मी और खुश्की के वातावरण में व्यक्ति रहे तो इससे भी नकसीर फूटने की संभावना बढ़ जाती है.
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  • नासिका में साइनस का संक्रमण होने से भी नाक से खून का रिसाव हो सकता है.
  • नाक को बहुत ज़ोर लगाकर सॉफ करना. इससे नासिका की आंतरिक में घर्षण उत्पन्न होता है तथा इससे ये झिल्ली फट जात है और खून निकलता है.
  • नाक में यदि बाहरी चीज़ें फासी हुई हों.
  • नाक में एलर्जी की वजह से (allergic rhinitis).
  • नाक में अतिरिक्त नस के मार्ग का बनना (vascular passage).
  • यदि नाक में पॉलिप्स (polyps) का निर्माण हो जाए.
  • उच्च रक्तचाप के कारण.
  • अमोनिया और अन्य घाटक उत्तेजक पदार्थों से संपर्क में आना.
  • नज़ला, जुकाम.
  • नाक में किसी तरह की स्प्रे करना.
  • उन्नतांश या समुद्र की सतह के उपर उँचाई में अचानक बदलाव (Change of altitude).


आयुर्वेद के अनुसार नकसीर फूटने के कारण (Etiology OF Nose-Bleed In Ayurveda In Hindi)

आयुर्वेद के अनुसार पित्त के बढ़ जाने से नासिका से खून आता है. परंतु यह वात के बढ़ जाने से भी हो सकता है. जिन लोगों में वात और पित्त दोनों में ही असंतुलन पाया जाए, उनमें उच्च रक्तचाप और नाक से खून आने की समस्या की संभावना सर्वाधिक होती है.


नाक से खून बहने के उपचार (Treatment Of Nose-Bleed In Ayurveda In Hindi)

  • ठंडे पानी का सेवन अधिक करें
  • कोल्ड कंप्रेशन या माथे पर ठंडे पानी की पट्टियों को लगाकर उनका उनसे सिर ठंडा रखें.
  • नाक को पिचक कर बंद करें. अंगूठे और पहली उंगली की सहायता से नाक को 2-3मिनट तक दबाएँ. इससे नाक से खून आना बंद हो जाता है.
  • घी के औषधीय प्रयोग: घृत की दो बूँद लेकर उसको नाक में डालने चाहिए. घी इतना संतुलनकारी है की यह खून के बहाव को रोक देगा.
  • यदि वातावरण को नमी युक्त बनाने भी अनिवार्य है. गर्मियों के दिनों में नामी-प्रदान करने वाले पौधे अपने घर और रहने के क्षेत्र में लगाएँ. गार्डेन पाम इस कारया को बहुत बखूबी करता है.
  • औषधीय प्रयोग : आयुर्वेदचार्य की सलाह से ही इस प्रयोग को करें अन्यथा बिल्कुल न करें. मंजिष्ठ और काम दूध रस से बनी औषधि नाक से खून आना रोकने के लिए बहुत कारगर है. परंतु काम दूध रस कभी भी चिकित्सक के परामर्श बिना नही लेनी चाहिए, ये बहुत तेज़ औषधि है और बिना आवश्यकता लेने पर इसके परिणाम घातक भी हो सकते हैं.
  • जूस का प्रयोग: क्रॅनबेरी और अनार के रसों को बराबर मिश्रण में सेवन करने से इस तकलीफ़ को होने से रोका जा सकता है.
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  • अनार के जूस की कुछ बूँदें नाक में डालने से भी व्यक्ति को इस तकलीफ़ में लाभ मिलता है.

भोजन द्वारा पित्त का शमन (Diet For Pacification Of Epistaxis/ nose-bleed In Hindi)

हालाँकि पित्त के बढ़ने से ही नाक से खून आने की समस्या होती है. जब पित्त के तीक्ष्ण होने के कारण ये समस्या उत्पन्न हो जाती है. क्योंकि ये शरीर की गर्मी बढ़ने से उत्पन्न हुई समस्या है इस कारण, गर्म, तेज़, मिर्च-मसालेदार भोजन का सेवन नही करना चाहिए.
शराब और धूम्रपान करना  इस रोग  में बिल्कुल भी अनुकूल नही है. अत्यधिक गर्मी अथवा खुले सूरज में काम करना भी अनुचित है.


घरेलू औषधीय प्रयोग (Home Remedies For Nose-Bleed In Hindi)

  • गुलकंद अथवा गुलाब के फूलों की पंखुड़ियों से बनी मीठी औषधि का सेवन उपयुक्त है.
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  • अम्लकि का प्रयोग शरीर को ठंडक प्रदान करता है. ये विटामिन सी, कॅल्षियम और आयरन में भरपूर औषधि है. आमला के मुरब्बे का प्रयोग या आमला के रस का सेंवन करने से ये तकलीफ़ शांत हो जाती है.

यदि इन सब आरामदायक घरेलू प्रयोग से आपको आराम नही आ रहा तो अवश्यमेव अपने चिकित्सक से जाँच करवाएँ. नाड़ी परीक्षण एक ऐसी विधि है जिससे शरीर में छुपी तकलीफ़ का पता आयुर्वेदचार्य रोगी की नाड की गति देखकर कर लेता है. अतएव योग्य आयुर्वेदचार्य से सलाह आवश्य लें.