शतावरी: एक गुणकारी रसायन

शतावरी का प्रयोग (Uses of Shatavari As Per Ayurveda In Hindi)

यह जड़ी बहुत ही उपयोगी है. यह सम्पूर्ण भारत में क्लाइंबर (climber) की तरह जो जंगल के क्षेत्रों पाई में जाती है. कई घरों और  निजी खेती में भी शतवारी का पौधा पाया जाता है. इस पौधे की जड़ अपने आप में अनेक औषधीय गुण लिए हुए है. इस पर सफेद रंग के खुश्बुदार फूल और लाल रंग के बहुत छोटे फल लगते हैं. ये फल वास्तव में ज़हरीले होते हैं. इस पौधे की जड़ी औषधीय रूप में आयुर्वेद में प्रयोग होती है.
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  • यह पित्त-शामक औषधि वास्तव में स्त्रीयों के लिए बहुत लाभदायक है. यही नही, परन्तु पुरुषों में भी इसके अनेक लाभ हैं और यह एक टॉनिक होने के साथ-साथ, आंतरिक शोथ का शामन कर सभी विशिष्ट अंगों (vital organs) को चिर काल तक स्वस्थ रखती है.
  • इस  औषधि के सेवन से यकृत (liver), पित्ताशय (gall- bladder), पेट और अन्य अंगों की आंतरिक परत पर उपशामक असर करता है इसलिए यह औषधि शोथ का निवारण करने में भी सक्षम है.
  • विश्व के कई क्षेत्रों में इस औषधि का प्रयोग घाव की सफाई के लिए किया जाता है. शतवारी फेफड़ों (lungs) में जलन और इनमें दमा जैसी दिक्कत से आई तकलीफ़ के कारण आए शोथ को शांत करने में भी सहयता करती है.
  • यदि पित्त के बढ़ने से शरीर में ख़ासकर रक्त या शरीर के रसों में यह तकलीफ़ उत्पन्न हुई हो तो शतवारी का प्रयोग अत्यंत सहायक है.
  • यह मस्तिष्क के स्नायु तंत्र की नसों को भी आराम और पोषण प्रदान करती है.
  • शरीर में जकड़न, दर्द, अनिद्रा इत्यादि मानसिक तनाव एवं वातज विकृति से उत्पन्न समस्यायों को भी शतावरी के सेवन से लाभ मिलता है.
  • शतावरी से ओजस का निर्माण भी होता है जो शरीर, मन और बुद्धि को रूप से उर्जा प्रदान करता है.
    यह रोग प्रतिकारक क्षमता को बढ़ाने के लिए भी सहायक है. वास्तव में यह औषधि एक रसायन है जो शरीर को हर प्रकार से पुष्टि प्रदान करती है.
  • इस औषधि के द्वारा मन में सात्विक भावनाएँ भी जागृत होती हैं. इसके सेवन से आध्यात्मिक प्रेम फलीभूत होता है.
  • यह पुराने बुखार को ठीक करने में भी समर्थ है.
  • माहवारी के शुरू होने से लेकर माहवारी के समाप्त हो जाने तक शतावरी के औषधीय गुण महिलायों को लाभ देती है.
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  • ये गर्भवती महिलायों में दूध की वृद्धि करती है. साथ ही गर्भाशय के स्वास्थ्य को सुधारने में सहायता करती है.
  • पुरुषों में भी रसों को बढ़ाने में शतावरी सहायता करती है तथा इससे शुक्राणु की संख्या और शक्ति दोनो में वृद्धि पाई जाती है.

शतावरी का सेवन (How To Take Shatavari As Per Ayurveda In Hindi)

शतावरी की जड़ को सुखाकर उसका चूर्ण बनाकर इसका सेवन किया जाता है. परंतु शतावरी से बना औषधीय घृत भी निर्मित किया जाता है जिससे इसकी औषधीय क्षमता का भरपूर फायदा सेवानकर्ता को मिलता है.

  • शुरू में केवल इस औषधि का एक चौथाई चम्मच लेना शुरू करें. धीरे-धीरे जैसे-जैसे शरीर में इस औषधि के प्रति सामंजस्य जब बन जाए तो बढ़ा कर इसकी मात्रा आधा चम्मच कर दें.
  • इसे दूध और घी के साथ लेना चाहिए. यह अश्वगंधा के साथ लेने से महिलायों को बहुत लाभ देती है और दूध के साथ दोनो का सेवन करने से महिलयों को स्वास्थ में बहुत लाभ मिलता है.
  • किन्ही एक विशेषज्ञ मानते हैं कि संतान उत्पत्ति से पहले कम-से-कम 4 साल तक नियमित रूप से शतवारी, अश्वगंधा और हल्दी का सेवन बराबर मात्रा में करने के बाद ही वास्तव में एक स्वस्थ संतान को जन्म देने के काबिल स्त्री का शरीर बनता है. साथ ही योगाभ्यास चले तो यह सर्वोत्तम स्थिति है.

प्रयोग निषेध (Contraindications To Use Of Shatavari As per Ayurveda In Hindi)

  • शतावरी का प्रयोग मूत्रवर्धक औषधियों के साथ नही करना चाहिए.
  • जिन लोगों को शतावरी से एलर्जी हो, उन्हें भी इसका उपयोग नही करना चाहिए.
  • जिनके शरीर में कफा की अधिकता है तथा जिनमें संकुलन, अतिप्रजन या आम की वृद्धि हो, उनमें इसका इस्तेमाल नही किया जाना चाहिए.