डायबिटिक न्यूरोपैथी का का आयुर्वेदिक उपचार

डायबिटिक न्यूरोपैथी (Diabetic Neuropathy Treatment In Hindi Ayurveda)

मधुमेह के रोग के कारण उत्पन्न होने वाली नसों की विकृति को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है. मधुमेह के रोग के कारण उत्पन्न होने वाली नसों की विकृति को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है. इस रोग में शरीर के बाहीय अंगों में सुन्न्ता और नसों की कार्यकारी शक्ति का ह्रास होता रहता है. मुख्य रूप से इसमें पाँवों में विकृत संवेदना उत्पन्न होती है. आम तौर पर पाँव मैं झंझनाहट और सुन्न्ता का आभास होता है. काई बार यह पीड़ा अत्यंत तीक्ष्ण और कष्टदायक होती है. जैसे-जैसे समय बीतता है, पाँवों की संवेदनशीलता समाप्त हो जाती है. इस अवस्था में अगर रोगी के पाँव में कोई घाव उत्पन्न हो जाए तो वह जल्दी ठीक नही होता अथवा बढ़कर नासूर का रूप ले लेता है. स्थिति इतनी विकट हो जाती है जिससे पाँव को काटना पड़ सकता है. शुरू-शुरू में पाँव और टाँगों में कमज़ोरी और चलने में दिक्कत अनुभव होती है. इसके अलावा मधुमेह के कारण तीन अलग प्रकार की नस-विकृति उत्पन्न होती है. थर्ड नर्व पॉल्ज़ी, डायबिटिक अमयोट्रोफ़ी और ऑटनामिक न्यूरोपैथी.Diabetic Neuropathy ayurveda treatment
अमयोट्रोफ़ी में जाँघ की मांसपेशियाँ भी सूख जाती हैं और बहुत कमज़ोर पड़ जाती है. जब मस्तिष्क की नसों पर इसका प्रभाव पड़ता है तब आँखों की देखने की शक्ति पर प्रभाव पड़ता है. काई बार तो आँख का रटिना भी इस कारण खराब हो जाता है और इस कारण से व्यक्ति स्थाई रूप से दृष्टिहीन भी हो सकता है.


डायबिटिक न्यूरोपैथी का निदान (Treatment Of Diabetic Neuropathy Ayurveda In Hindi)

सर्वप्रथम रोगी में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करना अति महत्वपूर्ण है. साथ ही साथ पाँव और नसों की प्राकृतिक कार्यक्षमता का पुनर्वास भी किया जाता है.
सर्वप्रथम रोगी में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करना अति महत्वपूर्ण है. साथ ही साथ पाँव और नसों की प्राकृतिक कार्यक्षमता का पुनर्वास भी किया जाता है. यह औषधियाँ खराब हुई नसों को पुष्टि प्रदान करती हैं. इनके प्रयोग से मधुमेह से उत्पन्न सब रोगों का निदान होने लगता है.

अश्वगंधा:  अश्वगंधा के प्रयोग द्वारा कमज़ोर हो चुकी नसों को शक्ति मिलती है. इसका असर देखने के लिए इसका प्रयोग कम से कम 1 महीने तक करना अति आवश्यक है.
Ashwagandha churna ayurveda hindi

शिलाजीत: हिमालय में पाया जाने वाला यह राल से बना पदार्थ स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है. इससे शरीर को ताक़त मिलती है. रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ जाती है और साथ ही साथ हर प्रकार से बल मिलता है.
यह मानसिक कार्यशीलता को बढ़ाता है और हृदयवर्धक औषधि है.

चंद्रप्रभा वॅटी: यह एक अत्यंत लाभदायक औषधि है जिसका नित्य सेवन करने से चंद्र के समान तेज व्यक्ति को प्राप्त होता है. इसके सेवन से मधुमेह से आई भयंकर कमज़ोरी का नाश होता है.