अधिमन्थ अथवा मोतियाबिंदु (Glaucoma) का आयुर्वेदिक उपचार

मोतियाबिंदु  का आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Treatment Of Glaucoma In Hindi)

मोतियाबिंदु या ग्लकोमा के रोग को साइलेंट थीफ  (Silent Thief) भी कहा जाता है. इस रोग का पता तब चलता है जब रोगी की दृष्टि में स्थाई विकार पैदा हो जाता है. अगर उसकी किस्मत अच्छी है तो चिकित्सक से नियमित जाँच करवाते हुए रोग का पता चल जाता है और उचित इलाज द्वारा इसके द्वारा होने वाले दृष्टि नाश से बचा जा सकता है. यह घातक रोग विश्व में अंधेपण का दूसरा प्रमुख कारण है.
मोतियाबिन्दु के रोग में आँख के उन रोगों का समूह है जिनसे ऑप्टिक तंत्रिका पर दुष्प्रभाव पड़ता है जिस कारण दृष्टि में स्थाई रूप से हानि हो जाती है. आँख की पुतली की अंदुरूनी सतह पर दबाव का निर्माण हो जाता है जिससे ऑपटिक तंत्रिका (optic nerve) और रटिना (retina) दोनों पर दुष्प्रभाव पड़ता है. glaucoma ayurvedic cure hindiयदि इसका इलाज ना किया जाए तो व्यक्ति कुछ ही समय में पूर्णत्यः अँधा हो सकता है. इस रोग एवं इसके उपचार का वर्णन सुश्रुत संहिता में किया गया है. इसे अधिमंत के नाम से लिखा गया है. कफज़ अधिमनत के उपचार में नयाणमृत लौह तथा त्रिफालादी वर्ती का प्रयोग इस ग्रंथ में लिखित रूप से मिलता है.


मॉडर्न मेडिकल साइन्स (Modern medical Science) के अनुसार यह दो प्रकार का होता है:
ओपन आंगल ग्लकोमा (Open angle glaucoma): यह सर्वाधिक रूप से पाया जाने वाला ग्लकोमा है जिसमें द्रव पदार्थ का प्रवाह आँखों के किनारों यानि कि ट्रबेक्युलर मेश्‍वोर्क (trabecular meshwork)  में अवरोधित हो जाता है.
एन्ग्ल क्लोषर ग्लकोमा (Angle-closure glaucoma): रोग की इस विकृति में किन्ही कम रोगियों में देखी जाती है. इसमें आँख में दबाव अचानक से बढ़ जाता है आइरिस (iris) और कॉर्नीया (cornea-आँख की रक्षा करने वाला श्वेत पटल).


ग्लकोमा के लक्षण (Symptoms Of Glaucoma In Hindi)

इस रोग से परिधि की दृष्टि में कमी आने लगती है. यह इसका प्रमुख लक्षण भी माना जाता है.
अचानक से होने वाला नेत्रशूल (आँख में दर्द). सिर में दर्द, दृष्टि का धुँधलापन, दृष्टि में उत्पन्न आभामंडल (halos). इस प्रकार के घातक लक्षणों के आते ही तुरंत ही अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए.


ग्लकोमा में उचित खानपान (पथ्य/ अपथ्य) एवं कुछ घरेलू नुस्खे (Diet Recommended For Glaucoma And Some Useful Home Remedies In Hindi)

जिस भोजन में अधिक विटमिन्स तथा मिनरल्स हों, उनका सेवन अधिक करें. यह बात वर्णन के योग्य है जो मिनरल्स और विटमिन्स आपको  प्राकृतिक भोजन द्वारा प्राप्त होते, वही लाभदायदक  है, सप्प्लिमेंट्स एवं मिनरल की गोलियाँ से ये तत्व शरीर में जसप ही नहीं हो पाते और मल के रूप में बाहर निकल जाते हैं.
अधिक सिटरस फलों, अंकुरित अन्न, अमरूद, गाजर, आम, टमाटर, केले, पपीता, कद्दू, जैसे पदार्थों का सेवन करना चाहिए.
त्रिफला चूर्ण का सेवन प्रतिदिन करने से भी इस रोग में लाभ मिलता है.Fruits in Glaucoma ayurveda hindi

  • बादाम की गिरी को कूटकर बराबर मात्रा में पिसी हुई काली मिर्ची और मिश्री के साथ रोज़ लेने से आँखों के सर्व रोगों में फयडा मिलता है.
  • इसी तरह छोटी एलाईची, मीठी सौंफ और मिशरी बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें. इस मिश्रण का एक चम्मच रोज़ सूभ खाली पेट 1 गिलास दूध के साथ लेना चाहिए. इस प्रयोग से चमत्कारिक लाभ मिलते हैं.
  • 20 मिलीग्राम प्याज़ का सत और इतनी ही मात्रा में शहद लेकर इसमें ४ ग्राम केपर मिला लेमन. इस पेस्ट से प्रतिदिन आँखों पर हल्की परत लगाकर लेप करें.
  • बराबर मात्रा में सौंफ, सूखी धनिया और थोड़ी सी ब्राउन शुगर ब्रेड का मिश्रण बनाएँ. रोज़ इसका 10 ग्राम सेवन करने से लाभ मिलता है. बराबर मात्रा में अदरक और नींबू का रस लें उसमे शहद मिलाएँ. इसका 1 ड्रॉप रोज़ दोनो आँखों में डालें.

ग्लकोमा के कारण (Causes Of Glaucoma In Hindi)

यह रोग दोष की प्रधानता के अनुसार विभिन्न प्रकार (कफज़, वातज, पित्तज़) का हो सकता है. इसका उपचार भी इसी पर निर्भर करता है. परंतु मुख्यतः यह रोग पित्त की विकृति से उत्पन्न होता है. आयुर्वेद के अनुसार आँखों की व्याधि का कारण पित्त दोष में विकृति के कारण उत्पन्न होता है. पित्त का शमन करने वाले भोजन का नित्य सेवन करने से तथा योग एवं प्राणायाम के अभ्यास से इस रोग से शीघ्र ही मुक्ति मिल जाती है.


मोतियाबिंदु  का आयुर्वेदिक उपचार ( Ayurvedic Treatment Of Glaucoma In Hindi)

आयुर्वेदीय उपचार में चार प्रकार से इस रोग का निदान किया जाता है

  • पंचकर्म
  • औषधि सेवन
  • योगाभ्यास
  • ध्यान.
    इन प्रयोगों द्वारा आँखों की पुतली में मौजूद द्रव पदार्थ के प्रवाह को सुनियंत्रित होने में मदद मिलती है जिससे आँख अपने प्राकृतिक स्वास्थ को प्राप्त कर ले है.
    पंचकर्म के कुछ प्रयोग थलम, शिरोधरा, तर्पण तथा नास्य जिनके किए जाते हैं जिनके द्वारा इस व्याधि में लाभ मिलता है. tarpan glaucoma ayurved hindi
  • गोतू कोला अथवा ब्राहमी, मालकन्गनी और महाबल का प्रयोग कर एक औषधीय लेप तैयार किया जाता है जो तलम क्रिया में उपयोग किया जाता है.
  • शिरोधारा में औषधीय तेल, औषधीय दुग्ध, एवं औषधीय मक्खन को विधिवध रूप से रोगी माथे पर गिराया जाता है जिससे चिकित्सकीय लाभ मिलता है. यह क्रिया 45-50 मिनिट तक चलती है.
  • तर्पण विधि नेत्र शुद्धीकरण की क्रिया है जिससे आँखों में ठंडक और स्वस्थता उत्पन्न होती है. इस विधि में आँखों के उपर औषधीय घृत द्वारा आधे घंटे तक लेप किया जाता है.
  • नास्यम में औषधीय तेल नाक में डाला जाता है तथा उसे नासिका द्वारा ग्रहण कर पूरे कपाल प्रदेश (head region) में पहुँचाया जाता है. वास्तव में हमारे नेत्र मस्तिष्क का दिखने वाला हिस्सा हैं. यदि मस्तिष्क में औषधि जाती है तो उसका लाभ नेत्रों को भी मिलता है.
  • इसके अलावा विरेचन की विधि द्वारा आँतों में मौजूद जीव विष आसानी से शरीर से निकल जाते हैं जिससे प्राण उर्जा में विस्तार आता है. यह रोग निवारण में निश्चित रूप से सहायक विधि है.
  • विरेचन की विधि द्वारा आँतों में मौजूद जीव विष आसानी से शरीर से निकल जाते हैं जिससे प्राण उर्जा में विस्तार आता है. यह रोग निवारण में निश्चित रूप से सहायक विधि है.

मोतियाबिंदु की चिकित्सा में प्रयोग होने वाली औषधियाँ ( Ayurvedic Herbs Useful In The Treatment Of Glaucoma In Hindi)

  • त्रिफला: इसके नित्य सेवन से आँखों के स्वास्थ पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है
  • पुनर्नवा: यह मूत्रवर्धक औषधि है जो गुर्दे एवं हृदय को पुष्टि देती है. छाती एवं पेट में मौजूद कफ को शांत कर खून से जीव विष (toxins) को निकाल देती है. इसका प्रयोग पुनरणवादी मंदूर के रूप में किया जा सकता है. यह शरीर को पुष्टि प्रदान कर ग्लकोमा में लाभ प्रदान करती है.
  • अमलकी: आवला anti-oxidants तथा विटामिन सी से भरपूर फल है. इस रोग आमला का नियमित प्रयोग आयुर्वेद में निर्धारित चिकित्सा विधि का अंग है.
  • हरतकी: इसी प्रकार हरतकी भी लाभदायक औषधि है. इसका प्रयोग भूख को बढ़ाने के लिए भी किया जाता है. amlaki and triphala glaucoma in hindi
  • विभीतकी: यह औषधि भी त्रिफला का हिस्सा है. यह हृदय वर्धक एवं सामान्य रूप से शरीर की पुष्टि प्रदायक औषधि है.
  • गुग्गूल: यह लिपिड्स के चयपचय (metabolism) को संतुलित करने वाला है तथा प्रत्येक कोशिका को उर्जा प्रदान करता है.
  • कुरकुमीन (Curcumin): हल्दी में मौजूद कुरकुमिन्स शरीर को लगभग 15 बीमारियों से बचाते हैं. यह मस्तिष्क और हृदय की सुरक्षा एवं पुष्टि करते हैं तथा हर प्रकार के शूल एवं सूजन को शांत करती है. उच्च रक्तचाप, पेट में गड़बड़ी जैसी समस्यायों में शुद्ध हल्दी का यथोचित प्रयोग निश्चित लाभ प्रदान करता है.

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