Ayurveda In Hindi

ग्रहनी (IBS) का आयुर्वेद द्वारा उपचार

ग्रहनी: (आई बी एस) IBS -Inflammatory Bowel Syndrome in Hindi

ग्रहनी (आई बी एस): इस रोग का कोई निश्चित कारण नही है. पाचाशय में  विभिन्न प्रकार की किण्वक(enzymes) का समूह मौजूद है जिससे खाए हुए भोजन का पाचन किया जाता है (अग्नि) इसी को जठराग्नि भी कहा जाता है. इस पाचाशय का कार्य एक तरफ से भोजन को ग्रहण करना है और दूसरी ओर से ना पचने वाले तत्वों का निष्कासन करना है. IBS digestive tract complications hindiपरंतु यदि यह तंत्र शक्ति विहीन पड़ जाए तो यह अनपचे भोजन को ही बाहर निकालने लग जाती है. इस कारण अनेक प्रकार की समस्याएँ एवम् रोग उतन्न हो जाते हैं. जिनमें से एक आई बी एस  है. इस व्याधि में आँतों की गति सामान्य से अधिक हो जाती है. इस कारण पेट में दर्द, कब्जियत, पेचिश, अथवा अंतडियों में तनाव उत्पन्न हो जाता है.


विभिन्न प्रकार की ग्रहिणी एवं उनके लक्षण (Four Types Of IBS according to Ayurveda And Their Symptoms : Hindi)

इस रोग में पाचक तंत्र में क्रम से बारी-बारी से रोगी को कभी कब्जियत और कभी पेचिश हो जाती है. इस रोग में रोगी को प्यास अधिक लगती है, मुँह में बेस्वाद्पन, आँखों से सामने अंधेरा आना, पैरों में सूजन, जिससे अंतडियों के उपरी अथवा निचले भाग में विभिन्न रूप से वायु आदि विकार होते रहते हैं.
इस रोग में सिर में दर्द, कमर में दर्द, जोड़ों अथवा छाती में दर्द इत्यादि लक्षण सामने आते हैं.IBS ayurveda in Hindi

  • कब्जियत-प्रधान वाला आइबेस वातज  ग्रहनी आई बी एस)
  • पित्तज ग्रहिनि प्रधान (पेचिश  की प्रधानता वाला आई बी एस)
  • कफज़ ग्रहनी प्रधान (दस्त-प्रधान आई बी एस)
  • त्रिदोष ग्रहनी प्रधान जटिल आई बी एस (Complex IBS)
    इसके अलावा आयुर्वेदीय शस्त्रों में दो अन्य प्रकार की ग्रहनी का भी उल्लेख है:
  • समग्रह ग्रहनी
  • घटियांत्र ग्रहनी ( Tympanites- predominant) वातज  ग्रहनी
    इस रोग में त्वचा की रुक्षता, गले और मुख का सूखना इस प्रकार के लक्षण देखने को मिलते हैं. रोगी को ज़्यादातर कब्जियत रहती है या फिर क़ब्ज़ के बाद दस्त, इस प्रकार का क्रम चलता रहता है. गॅस, खट्टे डकार, और अत्यधिक प्यास का लगना, हल्की ठंड महसूस होना, कमर में या कटी प्रदेश में दर्द, वज़न में गिरावट, अनिद्रा तथा घबराहट जैसे लक्षण इस रोग में पाए जाते हैं.

पित्तज ग्रहनी
अत्याधिक प्यास लगना, सीने में जलन, अधिक गर्मी लगना, चिड़चिड़ापन, बात-बात पर क्रोधित हो जाना, शरीर के अंगों में सूजन, बुखार आना, अत्यधिक पसीना आना, मल में अत्याधिक दुर्गंध का होना, डकार.

कफज ग्रहनी
वमन, अपच, मुख और कंठ प्रदेश में अत्यधिक लार का बनना, दुर्गंधयुक्त डकार, पेट पूरी तरह सॉफ ना हो पाना, छाती व पेट में भारीपन.
घटियांत्र ग्रहनी (Tympanites -predominant IBS) : इस प्रकार के रोग में प्रधान रूप से पेट में घरघराहट भरी आवाज़ के साथ-साथ आँतों का तेज़ी से गतिमान हो जाना है. यह रोग बच्चों में साध्य है, मध्यम आयु वालों के लिए आंशिक रूप से असाध्य एवं अंतिम अवस्था में पूर्णत्यः असाध्य  माना जाता है.


आयुर्वेद अनुसार ग्रहनी का उपचार (Treatment Of IBS According To Ayurveda in Hindi)

आयुर्वेद में दोष की प्रधानता के अनुसार इसका इलाज किया जाता है. इस रोग के उपचार हेतु अनेकानेक वात हर औषधियों का प्रयोग किया जाता है. गर्म पानी का सेवन इस रोग में अत्यंत लाभदायक है.

चिकित्सा पद्धति

आयुर्वेद के अनुसार इस रोग की चिकित्सा हेतु रोगी की शरीर की संरचना, प्रधान दोष और उसका आहार-विहार, इन सब कारकों को ध्यान में रखा जाता है. दोष के अनुसार औषधि का प्रयोग किया जाता है. रोगी को जीवनचर्या में सुधार के लिए लाभदायक परामर्श भी दिया जाता है.
उपचार की पद्धति आँतों से निष्कासित मल में जीववीश की मौजूदगी पर भी निर्भर करती है.
यदि आँतों में विषाक्त पदार्थ मौजूद हैं और व्यक्ति अपच से ग्रस्त है तो सर्वप्रथम आँतों की सफाई हेतु रोगी को उपवास रखना चाहिए. साथ-ही साथ उसे पाचक एवं वातहर औषधियाँ भी दी जाती है.

  • वातज ग्रहनी में चित्रकादि वॅटी के प्रयोग द्वारा पाचन को प्रबल किया जाता है. शंख वॅटी के प्रयोग से आँतों में पड़े जीव विष को निकाला जाता है.
    पाचक के उपरांत दशमूलादी घृत एवं त्रयुष्नदि घृत का प्रयोग लाभकर है.
  • कफज़ ग्रहनी में विरेचन विधि का प्रयोग अत्यंत प्रभावकारी सिद्ध होता है. रेचक औषधि के प्रयोग के उपरांत तीखे एवं खट्टे औषधियों का प्रयोग किया जाता है.
  • जटिल ग्रहनी का उपचार पंचकर्म की विधियों द्वारा किया जाता है जिसके पश्चात पाचक और वातहर औषधियों का प्रयोग हितकर सिद्ध होता है.
    इस प्रकार में तीनों दोषों से उत्पन्न ग्रहनी के लक्षण पाए जाते हैं. PAncharma therapy for IBS hindi
    अन्य दो प्रकार की ग्रहिनि का उपचार
  • संग्रहणी ग्रहनी : यह रोग का अधिक घातक स्वरूप है. इसमें अधिकतर दिन में रोगी के पेट में आँतों के अत्यधिक आंदोलन के कारण घरघराहट होती है जिससे उसे बेचैनी का अनुभव होता है. यह रात्रि के समय शांत हो जाती है. रोगी को पीड़ाजनक पतला मल विसर्जन होता है जिसमे अनपचा भोजन भी रहता है.
  • घटियांत्र ग्रहनी (Tympanites-predominant IBS): इस प्रकार की ग्रहिनी में पेट में अत्यंत घरघराने की आवाज़ आती है और आँतों में अत्यधिक आंदोलन पाया जाता है. विसरजित मल में अत्यधिक अनपचा पदार्थ की मौजूदगी पाई जाई है.

ग्रहिणी रोग में पथ्य एवं अपथ्य (Dietary Recommendations As Per Ayurveda In IBS In Hindi)

मुख्यतः साधारण भोजन ही खाया जाना चाहिए. परंतु जिन पदार्थों को खाकर गॅस बढ़ती हो, उन्हे भोजन में से निकाल देना हितकर है.

  • बीन्स, पत्तागोभी, आलू जैसे पदार्थ जिनसे अधिक वायु उत्पन्न होती , उन्हें ग्रहण ना करें. इसके अलावा सेब, अंगूर का रस, सूखे मेवे तथा केले का सेवन भी लाभकर सिद्ध होता है.
  • जिन रोगियों में लॅक्टोस से पाचक संबंधी समस्या पैदा होती है उन्हे दूध तथा दूध से बने पदार्थों का सेवन रोक देना चाहिए.Diet in IBS hindi
  • सोरबिटॉल (sorbitol), मान्निटॉल (mannitol) युक्त पदार्थों के सेवन से बचना सर्वथा उपयुक्त है.
    इसके विपरीत लस्सी का प्रयोग इस रोग का निदान है. हींग, ज़ीरा, का तड़का लगाकर और सेंधा नमक युक्त लस्सी का सेवन इस रोग में अत्यंत लाभकारी और सरल उपाय है.
    हल्का एवं सुपाच्य भोजन ही लें. बसी, तला हुआ, ठंडा, गरिष्ट भोजन, माँसाहार, इन सबका सेवन रोग में वृद्धि करता है.
    पथ्य: पुराने चावल, तोराई, मुंग की डाल, अनार, लौकी, जवार, सोंठ, काली मिर्च, लस्सी, गर्म पानी
    अपथ्य: मक्की, जौ, लोबिया, राजमा, पपीता, आलू, कचालू, प्याज़, सैन्जन (drumstick), साग, हरी पत्तियों वाली सब्जियाँ, माँस, अंडें, मदिरा, कद्दू, जिमिकन्द, आम, अनानास, तरबूज़, सेब, काजू.


    कुछ असरदार घरेलू प्रयोग (Some Ayurvedic Home Remedies For IBS In Hindi)

  • जिन भोज्य पदार्थों से तकलीफ़ बढ़ जाती है, उन्हें पहचान कर अपने भोजन से निकाल  दें.
  • आँतों की गतिशीलता को नियंत्रित करने वाले पदार्थों का सेवन हितकर है जैसे की इसबगोल क सेवन लाभ देता है. इसके साथ-साथ अधिक पानी पीना हितकर है.
  • सुनियमित जीवनचर्या को धारण करें, रात्रि को समय से शयन करना चाहिए, सोने से ३-४ घंटे पूर्व भोजन हो जाना चाहिए.IBS lifestyle habits treatment in hindi
  • प्रातः काल जल्दी उठकर योगाभ्यास तथा प्राणायाम करने से यह प्राकृतिक रूप से पूर्णत्यः समाप्त हो जाती है.

ग्रहिणी में उपयुक्त आयुर्वेदीय प्रयोग (Ayurvedic Treatment In IBS In Hindi)

वातज ग्रहिणी:
अदरक, लोंग, मीठी सौंफ, ज़ीरा, एलाईची, दालचीनी इत्यादि से पाचन क्रिया में सुधार आता है.
हरतकी के उपयोग से शरीर में मौजूद अधिक वात बाहर निकल जाता है. पुरानी क़ब्ज़ को ठीक करने के लिए त्रिफला अत्यंत लाभकारी है. रात्रि को सोने से पूर्व इसका सेवन करना चाहिए.
शतावरी, अश्वगंधा, तिल तैल, ये तीनो ही वात को शांत करते हैं. अतएव इनका उपयोग लाभकारी है. स्नान से पूर्व तिल तेल  से पेट पर हल्की मालिश करना अच्छा रहता है. मीठे, खट्टे और नमकीन तीनों तरह के भोजन का सेवन करना हितकर है.home remedies for IBS hindi

पित्तज ग्रहिणी:
अम्लकि का प्रयोग रोगी के लिए हितकारक और पुष्टि प्रदयक है
धनिया और पुदीना युक्त पानी पीने से बढ़ा हुआ नियंत्रित होता है
चंदन को घी में सिद्ध कर उसमें मीठी सौंफ, काली मिर्च, लोंग, पिपल्ली मिलाकर सेवन करने से बहुत लाभ मिलता है.
मुस्ता के सेवन से इस रोग से निवृत्ति प्राप्त होती है
घृत-कुमारी का रस, हल्दी, मंजिष्ठ, गुदुची, शतावरी ये सब पित्त को शांत कर पुष्टि प्रदान करते हैं.
मीठे, तिक्त (bitter) और कशाय(astringent) पदार्थों का सेवन अधिक करें.

कफज़ ग्रहिणी
अदरक, नींबू का रस, शहद द्वारा बढ़े हुए कफ को नियंत्रित किया जाता है.
त्रिकटु चूर्ण के प्रयोग से आँतों में फँसे विषैले मल के निकास में सहायक औषधि है.
हल्दी, एलाईची, दालचीनी, लोंग, ज़ीरा, जयफल, पिप्पली, सेंधा नमक का प्रयोग हितकर है.
गरम पानी के साथ आधा चम्मच हिंगवष्टक चूर्ण भोजन खाने के 1-2 घंटे पहले पाचक शक्ति को बढ़ाता है.
कटु, तिक्त और कशाय पदार्थों का सेवन अधिक करना चाहिए.


ग्रहिणी में उपयोग होने वाली आयुर्वेदिक औषधियाँ (Ayurvedic Medicines Useful In IBS In Hindi)

    • दादिमास्तक चूर्ण
    • जतिफालादि चूर्ण
    • बिल्वादि चूर्ण
    • चित्रकादि वॅटी
    • शंख वॅटी
    • दश्मूलादि घृत
    • पंचामृत परपाति
    • कुटज परपाति
    • रस-परपाति

नोट:

      यह औषधियाँ चिकित्सकीय परामर्श से ही लें.

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